الضحى
The Morning Hours • 11 ayahs • Meccan
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1कस़म है धूप चढ़ने के समय की!
2और क़सम है रात की, जब वह छा जाए।
3(ऐ नबी!) तेरे पालनहार ने तुझे न तो छोड़ा और न नाराज़ हुआ।
4और निश्चित रूप से आख़िरत आपके लिए दुनिया से बेहतर है।
5और निश्चय तेरा पालनहार तुझे प्रदान करेगा, तो तू प्रसन्न हो जाएगा।
6क्या उसने आपको अनाथ पाकर शरण नहीं दी?
7और आपको मार्ग से अनभिज्ञ पाया, तो सीधा मार्ग दिखाया।
8और उसने आपको निर्धन पाया, तो संपन्न कर दिया।
9अतः आप अनाथ पर कठोरता न दिखाएँ।[1]
10और माँगने वाले को न झिड़कें।
11और अपने रब के उपकार का वर्णन करते रहें।[2]