البروج
The Great Stars • 22 ayahs • Meccan
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1क़सम है बुर्जों वाले आकाश की!
2और क़सम है उस दिन की, जिसका वादा किया गया है!
3क़सम है गवाह की और उसकी, जिसके बारे में गवाही दी जाएगी!
4खाई वालों का नाश हो गया![1]
5जिसमें ईंधन से भरी आग थी।
6जबकि वे उस (के किनारों) पर बैठे हुए थे।
7और वे ईमान वालों के साथ जो कुछ कर रहे थे, उस पर गवाह थे।
8और उन्हें ईमान वालों की केवल यह बात बुरी लगी कि वे उस अल्लाह पर ईमान रखते थे, जो प्रभुत्वशाली और हर प्रकार की प्रशंसा के योग्य है।
9वह (अल्लाह) कि जिसके लिए आकाशों और धरती का राज्य है, और अल्लाह हर चीज़ से अवगत है।
10निश्चय जिन लोगों ने ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों को परीक्षण में डाला (सताया), फिर तौबा न की, तो उनके लिए जहन्नम की यातना है तथा उनके लिए जलाने वाली यातना है।
11निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे काम किए, उनके लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके नीचे नहरें बह रही हैं और यही बहुत बड़ी सफलता है।[2]
12निःसंदेह तेरे पालनहार की पकड़ बड़ी सख्त है।
13निःसंदेह वही पहली बार पैदा करता है और (वही) दूसरी बार पैदा करेगा।
14और वह है जो अत्यंत क्षमा करने वाला, बहुत प्रेम करने वाला है।
15वह अर्श (सिंहासन) का मालिक, बड़ा गौरवशाली है।
16वह जो चाहता है, कर गुज़रने वाला है।[3]
17(ऐ नबी!) क्या तुम्हें सेनाओं की ख़बर पहुँची है?
18फ़िरऔन तथा समूद की?[4]
19बल्कि वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, झुठलाने में लगे हुए हैं।
20और अल्लाह उनके पीछे से (उन्हें) घेरे हुए है।[5]
21बल्कि वह गौरव वाला क़ुरआन है।
22जो लौह़े मह़फ़ूज़ (सुरक्षित पट्टिका) में लिखा हुआ है।[6]